प्रदेश के पूर्व क्षेत्र के जिलों में भी दुग्ध उत्पादन वृद्धि के प्रयास हों

Posted on: 30 July 2024 Share

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्य प्रदेश के पश्चिमी अंचल में दुग्ध उत्पादन भरपूर है। इसके मुकाबले सघन वन वाले पूर्व क्षेत्र में दुग्ध उत्पादन के प्रयासों को बढ़ाया जाना चाहिए। प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र के जिलों में रहने वाले जनजातीय समाज द्वारा वर्षों से पशुपालन और दुग्ध उत्पादन किया जाता रहा है। इसमें वृद्धि न होना चिंतनीय और अध्ययन का विषय है। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड प्रदेश में दुग्ध उत्पादन, पशुधन सुधार, चारा क्षेत्र को बढ़ाने और दुग्ध व्यवसाय से लोगों को आर्थिक उन्नयन कर उनकी जिंदगी बदलने के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहयोग एवं मार्गदर्शन करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज मंत्रालय में प्रदेश में दुग्ध उत्पादन, दुग्ध एकत्रीकरण और सांची दुग्ध संघ की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में दुग्ध उत्पादन एवं एकत्रीकरण तथा साँची दुग्ध संघ की गतिविधियों को बढ़ाने संबंधी कार्य योजना पर चर्चा की। बैठक में पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, मुख्य सचिव श्रीमती वीरा राणा, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय डॉ राजेश राजौरा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने बोर्ड की अखिल भारतीय स्तर पर संचालित गतिविधियों की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के अध्यक्ष श्री मीनेश शाह और पशुपालन एवं डेयरी विभाग के मध्य एनडीडीबी के साथ परामर्श और सहयोग के उद्देश्य से एक त्रिपक्षीय करारनामे पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री गुलशन बामरा उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज डॉ. मीनेश शाह से मध्यप्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाकर विभिन्न उपायों से किसानों और पशुपालकों के आर्थिक उन्नयन के माध्यम से उनकी जिंदगी बदलने के संबंध में विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बोर्ड के सहयोग और मार्गदर्शन से इस क्षेत्र में निश्चित ही महत्वपूर्ण कार्य होंगे।

करारनामा : प्रमुख विशेषताएं

राज्य और केंद्र सरकार के तालमेल से डेयरी सहकारी समितियों के दुग्ध उत्पादकों को पशु नस्ल सुधार और आय विविधीकरण जैसी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए ऋण और सब्सिडी भी प्रदान की जाएगी।

अंतर विभागीय समन्वय भी बढ़ाया जाएगा।

सहकारी डेयरी क्षेत्र विकास के लिए वित्तीय सहायता और अन्य दायित्वों के लिए भारत सरकार के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा।

ग्वालियर और जबलपुर दुग्ध संघ के पुनरुत्थान के प्रयास होंगे। शहडोल और रीवा संभाग के लिए नए दुग्ध संघ की स्थापना का भी सुझाव है।

डेयरी सहकारी समितियां के लिए चुनाव प्रक्रिया में श्रेष्ठ प्रथाओं को अपनाया जाएगा।

मानव संसाधन की पदस्थापना और क्षमता निर्माण के प्रयास होंगे।

दूध और दूध के उत्पादों की बाजार में विपणन गतिविधियों को भी मजबूत बनाया जाएगा।

भारत के अन्य राज्यों में विपणन और विदेशों में निर्यात के लिए नीतिगत सुझाव प्राप्त किए जाएंगे।

मौजूदा बुनियादी ढांचे के श्रेष्ठ उपयोग, संयंत्र प्रौद्योगिकी उन्नयन और एंड टू एंड डिजिटलीकरण पर ध्यान दिया जाएगा।

दूध के संकलन, परिवहन और प्र-संस्करण के विभिन्न चरणों में गुणवत्ता सुधार के उपाय लागू होंगे।

मध्यप्रदेश में डेयरी सहकारी समितियां के गठन के माध्यम से सहकारी कवरेज का विस्तार होगा। कृषक प्रशिक्षण और सहकारी डेयरी कवरेज में वृद्धि के लिए सहकारिता अधिनियम के तहत पंजीकृत किसान उत्पादक संगठन, स्व सहायता समूह और बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) को शामिल करने के लिए सहयोग प्राप्त किया जाएगा।